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महेश नवमी पर कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में हुआ भव्य रुद्राभिषेक, श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने की विश्व कल्याण की प्रार्थना

गढ़मुक्तेश्वर/कल्याणपुर। महेश नवमी के पावन अवसर पर गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के प्राचीन एवं ऐतिहासिक कल्याणेश्वर महादेव मंदिर, कल्याणपुर में विशेष रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने भगवान कल्याणेश्वर महादेव का विधि-विधानपूर्वक रुद्राभिषेक कर राष्ट्र की उन्नति, विश्व शांति, सनातन धर्म की रक्षा तथा समस्त मानवता के कल्याण की कामना की।


अनुष्ठान में राजस्थान भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कुँवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल विशेष रूप से उपस्थित रहे। रुद्राभिषेक का वैदिक विधान श्रीमहंत सूर्यनंद गिरि जी महाराज एवं आचार्य नित्यानंद जी महाराज द्वारा संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा।


इस अवसर पर श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि महेश नवमी भगवान शिव की आराधना, धर्म, सेवा और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि भगवान कल्याणेश्वर महादेव की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का केंद्र है कल्याणेश्वर महादेव मंदिर
कल्याणपुर स्थित कल्याणेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की प्राचीनतम शिव उपासना स्थलों में से एक माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं एवं जनश्रुतियों के अनुसार इस शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में पांडवों द्वारा अपने वनवास एवं तीर्थ भ्रमण के दौरान की गई थी। मान्यता है कि पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना कर विजय, कल्याण और धर्म स्थापना का आशीर्वाद प्राप्त किया था, जिसके कारण इस स्थल का नाम “कल्याणेश्वर महादेव” पड़ा।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति से पूजा-अर्चना करने पर भगवान शिव भक्तों के कष्टों का निवारण कर उनके जीवन में कल्याण एवं सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सावन मास, महाशिवरात्रि एवं अन्य प्रमुख शिव पर्वों पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

कार्यक्रम के अंत में भगवान शिव की महाआरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उपस्थित भक्तों ने धर्म, संस्कृति और समाज के उत्थान के लिए संकल्प लेते हुए विश्व शांति एवं मानव कल्याण की प्रार्थना की।

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