स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दी श्री राधा रानी प्राकट्य दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं

ऋषिकेश। सनातन संस्कृति के दिव्य मूल्यों, भक्ति, करुणा और समर्पण का प्रतीक श्री राधा रानी जी के प्राकट्य दिवस पर देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री राधा रानी के जीवन और उनके प्रेम-संदेश को आधुनिक समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
श्री राधा रानी: प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की प्रतीक
स्वामी जी ने कहा कि श्री राधा रानी प्रेम की वह अनंत धारा हैं, जो भौतिक सीमाओं को लांघकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ती हैं। उनका प्रेम केवल श्रीकृष्ण जी के प्रति नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के प्रति एक आदर्श है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम न लेन-देन है, न स्वार्थ, बल्कि निःस्वार्थ समर्पण, करुणा और माधुर्य है।
राधा-कृष्ण: अधूरापन में पूर्णता का भाव
स्वामी जी ने कहा कि श्री राधा जी के बिना श्रीकृष्ण अधूरे हैं और श्रीकृष्ण बिना राधा जी। यही भाव भक्ति की गहराई को प्रकट करता है। श्रीमद्भागवत महापुराण, गीता और भक्ति-साहित्य में श्री राधा जी को प्रेम और भक्ति के शिखर रूप में वर्णित किया गया है।
संत सूरदास, मीराबाई, रसखान जैसे भक्तों ने राधा-कृष्ण लीला को मानव जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना है।
अहंकार से रहित प्रेम ही सच्चा प्रेम है
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जब तक हमारे हृदय में अहंकार का स्थान है, तब तक सच्चा प्रेम संभव नहीं। राधा जी ने अपने अस्तित्व को श्रीकृष्ण में विलीन कर दिया, यही आत्मसमर्पण का आदर्श है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने कर्तव्यों, कर्म और निष्ठा को ईश्वर को समर्पित करता है, तभी जीवन सार्थक होता है।
राधा रानी का दिव्य प्रेम आज के समाज के लिए समाधान
स्वामी जी ने वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के तनावग्रस्त जीवन में प्रतिस्पर्धा, अहंकार और स्वार्थ के कारण समाज बिखर रहा है।
ऐसे में श्री राधा रानी का निःस्वार्थ प्रेम और करुणा हमें पुनः एकजुट करने की क्षमता रखता है। उनकी भक्ति हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयाँ भी भक्ति और प्रेम से माधुर्य में बदल सकती हैं।
प्रणब मुखर्जी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारत के 13वें राष्ट्रपति और भारत रत्न स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणास्पद रहेगा।



