नये वर्ष के पहले दिन श्रीदूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

तड़के चार बजे से शुरू हुआ जलाभिषेक, कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था
गाजियाबाद। वर्ष 2026 के पहले दिन गाजियाबाद स्थित प्राचीन एवं सिद्धपीठ श्रीदूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। नववर्ष के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा दूधेश्वरनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखते ही बन रही थी।

मंदिर परिसर और उसके आसपास तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालु “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष करते हुए बाबा के दर्शन के लिए घंटों तक कतार में खड़े रहे।

श्रीदूधेश्वरनाथ मठ के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि ने बताया कि ब्रह्ममुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र हो चुके थे। जलाभिषेक का क्रम प्रातः चार बजे से पहले ही प्रारंभ हो गया था।

उन्होंने बताया कि वे स्वयं सुबह चार बजे से धूनी के समीप विराजमान होकर बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक कर दर्शनार्थियों को आशीर्वाद एवं प्रसाद प्रदान कर रहे हैं।
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई। बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे सभी बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं का कहना था कि नववर्ष की शुरुआत भगवान शिव के दर्शन से करने से पूरे वर्ष सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तड़के अंधेरे में ही मोर्चा संभाल लिया। मंदिर परिसर और आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। मंदिर सेवकों, स्वयंसेवकों और प्रशासन के सहयोग से श्रद्धालुओं की कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी गई।
श्रीमहंत नारायण गिरि ने अंग्रेजी नववर्ष पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव का जलाभिषेक करने को एक अच्छी और सकारात्मक परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष की वास्तविक शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है, जो इस वर्ष 19 मार्च को है, लेकिन वर्तमान समय में अंग्रेजी नववर्ष को व्यापक रूप से मनाया जाता है।

ऐसे में नववर्ष की शुरुआत ईश्वर की पूजा-अर्चना से करना अत्यंत शुभ है। इससे न केवल भक्ति और आध्यात्म की भावना प्रबल होती है, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा, परंपरा और सनातन विरासत के प्रति लोगों की आस्था और जिज्ञासा भी बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि नववर्ष पर केवल जश्न और भौतिक उत्सवों की बजाय भगवान की आराधना करना सनातन धर्म के लिए शुभ संकेत है। इससे समाज में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है और सनातन धर्म अधिक सशक्त, संगठित एवं एकजुट होता है।
नववर्ष के पहले दिन श्रीदूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब यह संदेश देता है कि आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय समाज अपनी धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।



