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नरेन्द्र मोदी का जीवन संदेश-राष्ट्र ही परम पूज्य, सेवा ही परम साधना

  • नेतृत्व, दृष्टि और सेवा का उत्सव- चित्रकला प्रदर्शनी में नरेन्द्र मोदी के जीवन के अमूल्य क्षण
  • भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिवस पर कोटि-कोटि शुभकामनाएँ


दिल्ली/ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 75 वें जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली में ’’नेतृत्व, दृष्टि और सेवा का उत्सव-चित्रकला प्रदर्शनी में नरेन्द्र मोदी के जीवन के अमूल्य क्षण’’ को दर्शाने वाली चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
विवेकानंद यूथ कनेक्ट फाउंडेशन द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन डॉ. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के सहयोग से “नेतृत्व, दृष्टि और सेवा का उत्सव कला के माध्यम से” नामक विशेष चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया।


इस प्रदर्शनी में 65 से अधिक अनूठी चित्रकृतियाँ प्रदर्शित की गयीं, जो प्रधानमंत्री, भारत, नरेन्द्र मोदी के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को सजीव करती हैं। बचपन से लेकर आज तक के उनके कार्य, जनसेवा, तप, त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व की यात्रा को बड़ी ही खूबसूरती से दिखाया गया है। यह आयोजन आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में उनकी प्रेरणादायी भूमिका को रेखांकित करता है।

17 सितम्बर से 21 सितम्बर तक चलने वाली यह प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक डॉ. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, 15 जनपथ रोड, नई दिल्ली में जनता के लिए खुली रहेगी। साथ ही, इस अवसर पर विशेष कॉफी टेबल बुक और वेबसाइट भी लॉन्च की गयी।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर, जब हम सृष्टि के दिव्य शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की स्मृति और उनकी सृजनशीलता को नमन करते हैं, उसी दिन भारत को एक ऐसे युगपुरुष के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी जी प्राप्त हुए, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण का शंखनाद किया। नरेन्द्र मोदी आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के शिल्पकार के रूप में जाने जाते हैं। उनका जीवन तप, त्याग, सेवा और संकल्प का जीता-जागता उदाहरण है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्र को केवल भौतिक विकास की ऊँचाइयों तक नहीं पहुँचाया बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक धरोहर को भी नई दिशा दी। वे ऐसे नेता हैं जिन्होंने ‘विकास’ को ‘संस्कार’ से जोड़ा, ‘विजन’ को ‘विरासत’ से जोड़ा और ‘समृद्धि’ को ‘साधना’ से जोड़ा।
आपके नेतृत्व में भारत ने न केवल विज्ञान, तकनीक और डिजिटल क्रांति में विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी, बल्कि योग, आयुर्वेद, संस्कृति और अध्यात्म के माध्यम से पूरी दुनिया को जीवन की वास्तविक कला का संदेश भी दिया। 21वीं सदी का भारत आज जिस आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ विश्व से संवाद कर रहा है, वह प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है।

श्री मोदी ने अपने जीवन का हर क्षण राष्ट्रसेवा को समर्पित किया। वे ‘प्रधानमंत्री’ नहीं, बल्कि ‘प्रधान सेवक’ के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करते हैं। उनकी यही विनम्रता, यही समर्पण और यही राष्ट्रप्रेम उन्हें युगपुरुष बनाता है। उनके नेतृत्व में भारत ने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, गंगा संरक्षण, आत्मनिर्भर भारत जैसी अनेकों क्रांतियों का आरंभ किया। ये केवल सरकारी योजनाएँ नहीं हैं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आत्मा से जुड़ा हुआ आंदोलन है।
आज जब हम विश्वकर्मा जयंती मनाते हैं, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नरेन्द्र मोदी आधुनिक भारत के विश्वकर्मा हैं। जिस प्रकार भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना की, उसी प्रकार मोदी जी ने आधुनिक भारत की आधारशिला को नए आयाम दिए। उन्होंने देश को केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं दी, बल्कि आत्मगौरव, आत्मविश्वास और आत्मसंस्कृति की नींव भी मजबूत की।
आपकी नीतियों ने गाँव से लेकर गगनचुंबी इमारतों तक, किसान से लेकर वैज्ञानिक तक, युवा से लेकर महिला शक्ति तक, सभी को विकास के पथ पर साथ चलने के अवसर दिये। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मंत्र भारत के नवयुग का ध्रुवतारा बन चुका है।
आधुनिक भारत की यह गौरवशाली यात्रा केवल श्री मोदी जी की राजनीति नहीं, बल्कि उनके जीवन की तपस्या है। उनके भीतर का संतुलन अद्भुत है वे आधुनिक तकनीक के समर्थक हैं और साथ ही आध्यात्मिक धारा के साधक भी। वे भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए न केवल आर्थिक सुधारों की नींव रख रहे हैं, बल्कि मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों का भी प्रसार कर रहे हैं।
भारत की जनता के लिये वे केवल नेता नहीं, बल्कि उनके अपने परिवारजन है। यही कारण है कि आज उनका जन्मदिवस केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के भारतीयों और भारत-प्रेमियों के लिए प्रेरणा का पर्व है।
परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से हम उन्हें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए यही प्रार्थना करते हैं कि आप सदैव स्वस्थ, दीर्घायु और ऊर्जावान रहें। आपका यह जीवन भारत माता की सेवा में सतत समर्पित रहे और आने वाली पीढ़ियाँ आपको युगपुरुष और आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में सदा स्मरण करें।
आपके इस अमूल्य जीवन दर्शन से प्रेरित होकर भारत में निरंतर विकास और संस्कारों की धारा में प्रवाहित होती रहे, यही हम सबकी सामूहिक प्रार्थना है। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. राजेश और डीएआईसी के निदेशक आकाश पाटिल ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारत के युवाओं को नेतृत्व, दृष्टि और सेवा की प्रेरणा देगी।

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