जनआवागमन सर्वोपरि, नागरिक सुविधा प्राथमिकता : असीम अरुण

आरडीसी राजनगर क्षेत्र को सुव्यवस्थित व सुंदर बनाने के निर्देश
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री एवं जनपद गाजियाबाद के जिला प्रभारी मंत्री असीम अरुण की अध्यक्षता में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) कार्यालय में आरडीसी राजनगर क्षेत्र के विकास एवं व्यवस्थाओं को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष जीडीए, नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), कमिश्नर सहित जिले के समस्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में विशेष रूप से आरडीसी राजनगर के बीचो-बीच स्थित मुख्य सड़क से संबंधित समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि लगभग छह वर्ष पूर्व इस सड़क को बंद कर स्ट्रीट वेंडिंग एवं अन्य गतिविधियों के विकास की योजना बनाई गई थी, जो अब तक पूरी तरह क्रियान्वित नहीं हो सकी।

इसके चलते क्षेत्र में आवागमन, पार्किंग तथा यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और आम नागरिकों को निरंतर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था।
इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए मंत्री असीम अरुण ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए एक नई, व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए, जिससे आरडीसी राजनगर क्षेत्र को शहर के मध्य एक सुव्यवस्थित, सुंदर एवं उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
“शहर के केंद्र में स्थित आरडीसी राजनगर क्षेत्र का विकास इस प्रकार होना चाहिए कि आम नागरिकों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। आवागमन, पार्किंग, स्ट्रीट वेंडिंग तथा आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और सुचारू होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य विकास के साथ-साथ शहर को सुंदर और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।”
माननीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि—
वाहनों के आवागमन को सुचारू एवं सुरक्षित बनाया जाए, पार्किंग की बेहतर और वैज्ञानिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, स्ट्रीट वेंडिंग को नियोजित एवं व्यवस्थित ढंग से विकसित किया जाए, पुलिस, फायर ब्रिगेड एवं एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित विभाग संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण करेंगे, स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारियों से संवाद स्थापित करेंगे तथा एक सप्ताह के भीतर एक समग्र कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करेंगे, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।



