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किताबों की दुनिया में गोते लगाने उमड़ी पुस्तक प्रेमियों की भीड़ 

– “फ़्री” इंट्री ने दी बुक फ़ेयर को रफ़्तार 

– ⁠सरकार के प्रयास की लोग कर रहे हैं तारीफ़ 

– ⁠प्रकाशक भी हैं गदगद 

– सरकार का छोटे शहरों में ⁠बुक फ़ेयर के आयोजन का होगा फ़ायदा 

नई दिल्ली। शनिवार को किताबों की दुनिया में गोते लगाने के लिए पुस्तक प्रेमियों को जबरदस्त भीड़ पहुँची। भीड़ का आलम यह था कि भारत मंडपम के अंदर जहाँ बुक फ़ेयर का आयोजन किया जा रहा है वहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कई बुक स्टॉल पर तो अपनी पसंद की किताबें ख़रीदने के लिए लोग क़तार में लगे हुए थे। ऐसी स्थिति (भीड़ के ज़्यादा पहुँचने) के लिए पुस्तक मेले के आयोजक नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से इस बार बुक फेयर में लोगों की इंट्री को “फ़्री“ किया जाना प्रमुख कारण माना जा रहा है। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इस बार दर्शकों की इंट्री को फ़्री किए जाने को सरकार की एक दूरदर्शी पहल माना जा रहा है।

प्रभात कुमार (प्रभात प्रकाशन के निदेशक) कहते हैं कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। मेले में आने वाले पुस्तक प्रेमियों से शुल्क लेने का मैं विरोध नहीं कर रहा हूँ लेकिन हमारे देश के पीएम नरेंद्र मोदी जी लोगों से पढ़ने की अपील कर रहे हैं ऐसे में इंट्री को फ़्री किया जाना उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है। इस तरह की अपार भीड़ इससे पहले शायद ही कभी देखी गई होगी।

डायमंड बुक के निदेशक एन.के. वर्मा भी ऐसा ही कुछ कहते हैं। सामयिक प्रकाशन के प्रमुख महेश भारद्वाज कहते हैं कि इंट्री फ्री किए जाने का असर मेले पर पड़ा है, जबरदस्त भीड़ आई है। आइसेक्ट के विकास अवस्थी भी मानते हैं कि सरकार द्वारा विश्व पुस्तक मेले में लोगों के आने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिए जाने का निर्णय सही रहा है। 

वीकेंड पर हर साल मेले में भीड़ तो आती है लेकिन इस बार मेले में हर दिन यानी वीक डे में भी बेतहाशा भीड़ देखी गई है। यह भीड़ सिर्फ घूमने फिरने और मौज मस्ती के लिए नहीं आई है बल्कि पुस्तकें खरीद भी रही है जो प्रकाशकों के लिए एक अच्छी बात है।

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