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डॉ. कीर्ति काले को न्यूयॉर्क में मिला “हरप्रसाद शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मनीषी सम्मान”

  • ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. सत्यप्रकाश शर्मा और ‘गुलमोहर’ मंच की संस्थापिका मधु शर्मा ने यह सम्मान प्रदान किया।
  • इस अवसर पर नॉर्थ हेम्पस्टेड की प्रतिनिधि रागिनी श्रीवास्तव और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मुकेश मोदी भी उपस्थित रहे।

न्यूयॉर्क/गाजियाबाद। हिंदी साहित्य जगत की प्रख्यात कवयित्री डॉ. कीर्ति काले को न्यूयॉर्क के लॉन्ग आयलैंड स्थित प्लेनव्यू शहर की लाइब्रेरी में आयोजित एक भव्य समारोह में “हरप्रसाद शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मनीषी सम्मान” से अलंकृत किया गया। यह सम्मान हरप्रसाद शास्त्री चैरिटेबल ट्रस्ट एवं इंडो अमेरिकन कम्युनिटी वॉइस के संयुक्त तत्वावधान में प्रदान किया गया।

समारोह में ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. सत्यप्रकाश शर्मा एवं आभासी मंच ‘गुलमोहर’ की संस्थापिका मधु शर्मा ने संयुक्त रूप से डॉ. काले को सम्मान पत्र व प्रतीकचिह्न प्रदान किए। कार्यक्रम की शुरुआत 11 सितंबर की त्रासदी में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पण से हुई। तत्पश्चात डॉ. शर्मा ने हरप्रसाद शास्त्री जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

समारोह में विशेष अतिथि के रूप में नॉर्थ हेम्पस्टेड की प्रतिनिधि रागिनी श्रीवास्तव ने डॉ. काले को नगर परिषद की ओर से सम्मान पत्र देकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक मुकेश मोदी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सरस्वती वंदना के पश्चात आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ. कीर्ति काले ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय रचनाकारों ने भी अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को ऊर्जावान बनाया। संचालन मधु शर्मा द्वारा कुशलता से किया गया।

ज्ञात हो कि हरप्रसाद शास्त्री चैरिटेबल ट्रस्ट, गाजियाबाद एवं अमेरिका में पिछले 15 वर्षों से हिंदी भाषा, साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है। ट्रस्ट, गाजियाबाद के 15 विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति प्रदान करता है, साथ ही आईआईटी रुड़की एवं एनआईटी जमशेदपुर जैसे संस्थानों में भी छात्रवृत्ति के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर रहा है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि भविष्य में जब भी कोई प्रमुख साहित्यकार अमेरिका यात्रा पर आएंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की योजना है, ताकि हिंदी के प्रचार-प्रसार को वैश्विक मंच पर और बल मिल सके।

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