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जब हम पौधे लगाते हैं, तो धरती से मित्रता का एक पवित्र बीज भी बोते हैं : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

थीम, सेतु निर्माण-आइए, प्रकृति के साथ करें मित्रता का सेतु निर्माण

ऋषिकेश। अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस की इस वर्ष की थीम है सेतु निर्माण है जो यह प्रेरणा देती है कि मित्रता केवल व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि संस्कृति, समुदाय, देश और प्रकृति के साथ भी एक आत्मीय संबंध बनाकर सहअस्तित्व की दिशा में बढ़ा जा सकता है।
अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस पर आज जब विश्व एक ओर तकनीक और प्रगति की ऊँचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक असंतुलन, जलवायु परिवर्तन, और पर्यावरणीय संकट जैसे मुद्दे मानवीय जीवन को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि हम केवल इंसानों के साथ ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ भी मित्रता का सेतु बनाएं।
हमारी सनातन संस्कृति में प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि माता है। अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपने जीवन के सबसे पुराने मित्र प्रकृति के साथ संबंधों को पुनः स्मरण करें, उसका संरक्षण करें और उसके साथ सामंजस्य स्थापित करें।
सेतु निर्माण अर्थात् केवल दो व्यक्तियों या समुदायों के बीच पुल बनाना नहीं है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच भी एक ऐसा भावनात्मक, व्यवहारिक और स्थायी पुल बनाना है जो हमें एक-दूसरे के पूरक बनाता है।
स्वामी जी ने कहा कि जब हम पौधे लगाते हैं, तो हम केवल हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि धरती से मित्रता का एक पवित्र बीज भी बोते हैं। यह बीज न केवल वृक्ष बनकर छाया, ऑक्सीजन और फल देता है, बल्कि यह हमारे भीतर प्रकृति के प्रति करुणा, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना भी जाग्रत करता है। एक छोटा सा पौधा हमारे और धरती के बीच एक स्थायी संबंध का प्रतीक बन जाता है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची मित्रता वह है जो निःस्वार्थ हो, जो जीवनदायिनी हो, और जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेम और सुरक्षा प्रदान करे।
जब हम जल की बूँद बचाते हैं, तो हम नदियों से मित्रता निभाते हैं और जब हम प्लास्टिक मुक्त जीवन जीते हैं, तो हम वायु, जल और धरती तीनों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।
आईये आज मित्रता दिवस के अवसर पर एक पौधा अपने प्रिय मित्र के नाम पर लगाये। अपने मित्रों को पर्यावरण संवेदनशील उपहार बीज बम, पौधे या पुनः उपयोगी वस्तुएं दें।
अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस पर आइए, प्रकृति के साथ भी सेतु बनाएं और जीवन को हरित मित्रता से जोड़ें। जहां सेतु होंगे, वहीं समरसता होगी। जहां समरसता होगी, वहीं शांति और समृद्धि होगी। आइए, मित्रता को एक नई दिशा दें एक ऐसी दिशा जो प्रेमपूर्ण संबंधों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से युक्त हो।

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