ग्रामीण बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रही हैं शिक्षिका नाज़िया सुल्ताना..

विश्व महिला दिवस पर विशेष मिसाल
“कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”
इस पंक्ति को साकार कर रही हैं शिक्षिका नाज़िया सुल्ताना, जो ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार सराहनीय कार्य कर रही हैं।
नाज़िया सुल्ताना पिछले 13 वर्षों से प्रयागराज के जसरा स्थित कंपोजिट विद्यालय सुजौना में शिक्षण कार्य कर रही हैं। यह विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, जहां छात्राओं की संख्या भी काफी अधिक है। वह बालिकाओं को केवल शिक्षा ही नहीं दे रही हैं, बल्कि उन्हें जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही हैं।
नाज़िया सुल्ताना विद्यालय में ऐसा माहौल बनाने का प्रयास करती हैं, जहां बालिकाएं आत्मविश्वास और सुरक्षा के साथ पढ़ाई कर सकें। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि ग्रामीण क्षेत्र में बालिकाओं की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और छात्राएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
वह बालिकाओं की एक सजग काउंसलर के रूप में भी जानी जाती हैं। छात्राओं की समस्याओं को बड़ी सहजता से सुनकर उनका समाधान करती हैं और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही अभिभावकों से भी निरंतर संपर्क बनाए रखती हैं, जिससे शिक्षा का माहौल मजबूत हो सके।
विद्यालय में वह मीना मंच की नोडल शिक्षिका भी हैं और बालिकाओं से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का संचालन पूरे मनोयोग से करती हैं। इसके साथ ही वह छात्राओं को सरकार द्वारा बालिकाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी देती रहती हैं।
विद्यालय में उपलब्ध आईसीटी लैब के माध्यम से वह छात्राओं को होम साइंस से जुड़ी गतिविधियां सिखाती हैं। साथ ही बालिकाओं को सिलाई-कढ़ाई और मेहंदी लगाने का प्रशिक्षण भी देती हैं, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। विद्यालय में मिशन शक्ति अभियान के सफल संचालन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
नाज़िया सुल्ताना बालिकाओं को गुड टच-बैड टच तथा किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों के प्रति भी जागरूक करती हैं और जिम्मेदारी के साथ उनका मार्गदर्शन करती हैं। यही कारण है कि वह पूरे विद्यालय के बच्चों की पसंदीदा शिक्षिका बन चुकी हैं।
अपने जीवन की सफलता का श्रेय नाज़िया सुल्ताना अपने माता-पिता बशीर अहमद अंसारी और हसबुन निशा को देती हैं, जिन्होंने उन्हें अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए। विवाह के बाद उन्हें ससुर मोहम्मद हारून अंसारी और सास शगुफ्ता यासमीन का भी पूरा सहयोग मिला। उनके पति मोहम्मद शारिक हारून हर कदम पर उनके साथ एक मजबूत सहारे की तरह खड़े रहते हैं।
नाज़िया सुल्ताना दो बेटियों मलक आयत और अनमता आयत की मां हैं और उन्हें भी वही संस्कार और शिक्षा दे रही हैं, जो उन्हें अपने माता-पिता से मिले।
उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें मीना मंच की जनपद की सर्वश्रेष्ठ नोडल शिक्षिका के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें ब्लॉक और जनपद स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। पिछले वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।
आज नाज़िया सुल्ताना अपने समर्पण और मेहनत के दम पर ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं।



