गणेशजी के शुभ आगमन पर निकली शोभायात्रा, पुष्पवर्षा कर किया गया स्वागत

गाजियाबाद। गणेश चतुर्थी महोत्सव के पावन अवसर पर गाजियाबाद में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। संजय नगर सेक्टर-23 स्थित हनुमान मंदिर से भगवान श्रीगणेश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होती हुई अग्रवाल सदन पहुंची। जैसे ही शोभायात्रा अग्रवाल सदन पहुँची, वहां भक्तों ने पुष्पवर्षा कर भगवान गणेश का स्वागत किया और पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

धार्मिक महत्व पर प्रकाश
इस अवसर पर परमार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष वी.के. अग्रवाल ने कहा कि भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले गणपति पूजन से ही की जाती है। उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि यह त्योहार समाज में भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश भी देता है।
विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी.के. शर्मा हनुमान ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गणेश प्रतिमा का स्थान, मुख की दिशा, सूंड़ की स्थिति, आकार और सामग्री पूजा को शुभ और फलदायी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सही दिशा और उपयुक्त मूर्ति के चयन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा वातावरण पवित्र और आनंददायक बनता है।

पूजन-अनुष्ठान और समाज की भागीदारी
पूजा-अर्चना पंडित सुरेंद्र तिवारी, इंद्रेश तिवारी और अशोक झा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न कराई। भक्ति संगीत और गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भागीदारी निभाई। इनमें शशि प्रभा अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, शालिनी अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, आकांक्षा अग्रवाल, शिल्पी गुप्ता, लोकेश सिंगल, अजय अग्रवाल, बृजमोहन शर्मा, किरण शर्मा, वैभव वंदे ठाकुर, वंदना ठाकुर, गौरव गोयल, सुरेंद्र पाल त्यागी, बबली त्यागी, गजेंद्र शर्मा, रमेश चंद्र बंसल, राजकुमार कश्यप, डॉ. नीरज गर्ग (सीएमओ सर्वोदय हॉस्पिटल), डॉ. मंजू गर्ग, डीआर हरिश मोहन शर्मा, प्रदीप गर्ग, सुरेंद्र गहलोत सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।

भक्ति और उल्लास का संगम
पूरे आयोजन में बच्चों, महिलाओं और युवाओं ने विशेष उत्साह दिखाया। शोभायात्रा में आकर्षक सजावट, भजन-कीर्तन और भक्तिमय माहौल ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जयकारों की गूंज और भक्तों की आस्था ने यह संदेश दिया कि गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाला सांस्कृतिक उत्सव है।



