
- श्री राम धर्म के साकार स्वरूप, नैतिकता और न्याय के प्रतीक हैं : पूज्य मोरारी बापू
- सनातन धर्म किसी एक पंथ का नाम नहीं, बल्कि शाश्वत सिद्धांत है : आचार्य लोकेश
- भारत ने योग, ध्यान और आयुर्वेद से विश्व को दिशा दी : विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली। भारत मंडपम में अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के तत्वावधान में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा के द्वितीय दिवस पर विशेष आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजक एवं अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश जी ने मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

विश्व शांति मिशन के अंतर्गत 17 से 25 जनवरी तक चल रही इस रामकथा में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य लोकेश जी ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक पंथ या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक शाश्वत, सार्वकालिक और सार्वभौमिक सिद्धांत है, जो समस्त मानवता को जोड़ता है।

पूज्य मोरारी बापू ने अपने उद्बोधन में कहा कि “राम विग्रहवान धर्मः”—श्रीराम स्वयं धर्म के साकार स्वरूप हैं। वे नैतिकता, आदर्श, जीवन-मूल्यों और न्याय के प्रतीक हैं। श्रीराम का जीवन ‘राजधर्म’ और ‘लोकधर्म’ के बीच संतुलन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सत्य, करुणा, सेवा और अहिंसा जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं में ठहराव नहीं, बल्कि प्रगतिशील सोच और निरंतर प्रवाह होना चाहिए। रामचरितमानस समस्त जीवों के कल्याण के लिए है और रामकथा का उद्देश्य जीवन को सही दृष्टि से समझना है।

मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत भूमि केवल एक देश नहीं, बल्कि एक पवित्र आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ वेद, उपनिषद और आगमों की रचना हुई। योग, ध्यान और आयुर्वेद जैसी अमूल्य ज्ञानधाराएँ भारत ने विश्व को प्रदान की हैं। भारत धार्मिक विविधता, शांति और सहिष्णुता का प्रतीक रहा है। राजधानी दिल्ली में जैन आचार्य लोकेश द्वारा पूज्य मोरारी बापू की रामकथा का आयोजन ‘अनेकता में एकता’ का सशक्त उदाहरण है।

कथा के दूसरे दिन स्वामी शैलेंद्र (ओशो के भ्राता) ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि राम सभी का मूल हैं और उनका चरित्र मानवता को एकसूत्र में बांधता है।
विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेश जी ने कहा कि सनातन चेतना वह जोड़ने वाली शक्ति है, जो हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध सहित सभी धर्मों को एक सूत्र में पिरोती है। भगवान महावीर के अहिंसा, शांति और सद्भावना के सिद्धांत आज के हिंसा और युद्ध से जूझते विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं और वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं।
रामकथा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का परिवार भी शामिल हुआ। उनके पुत्र नीरज सिंह एवं बहू ने कथा श्रवण किया। इसके अतिरिक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
भारत मंडपम के मल्टीपर्पस हॉल में आयोजित इस रामकथा में प्रतिदिन लगभग 3000 से अधिक श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं और विश्व शांति के इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठा रहे हैं।



